जगदलपुर। जगदलपुर में बस्तर दशहरा की काछनगादी परंपरा निभाने वाली 12 साल की पीहू दास की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात नहीं हो पाई। आरोप है कि 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति के बस्तर दौरे के दौरान लालबाग मैदान में इस परंपरा को समझाने के लिए दूसरी बच्ची को उनसे मिलवाया गया। इसे लेकर पनका समाज ने नाराजगी जताई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार और आमसभा कार्यक्रम में शामिल होने जगदलपुर पहुंची थीं। इस दौरान लालबाग मैदान में बस्तर की विभिन्न परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए गए थे। काछनगादी परंपरा से जुड़े स्टॉल पर राष्ट्रपति की एक बच्ची से मुलाकात कराई गई।
पनका समाज के प्रतिनिधियों और काछनगादी के मुख्य पुजारी गणेश दास का कहना है कि इस रस्म को पीहू दास निभाती हैं। ऐसे में परंपरा का प्रतिनिधित्व करने के लिए पीहू को राष्ट्रपति से मिलवाया जाना चाहिए था। समाज के लोगों ने राष्ट्रपति के साथ दूसरी बच्ची की मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए सवाल उठाए हैं।
पीहू बोली- मैं भी राष्ट्रपति से मिलना चाहती थी
काछनगादी की रस्म निभाने वाली पीहू दास ने कहा कि वह भी राष्ट्रपति से मिलना चाहती थी। उसकी इच्छा थी कि वह उन्हें बस्तर की इस परंपरा के बारे में बताए, लेकिन उसे वहां नहीं ले जाया गया। पीहू ने कहा कि उसकी जगह दूसरी बच्ची को राष्ट्रपति से मिलवाया गया, जिससे वह नाराज है।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने इस मामले में प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि राष्ट्रपति से मिलवाई गई दूसरी बच्ची कौन थी और उसे इस भूमिका में किस आधार पर शामिल किया गया।
फिलहाल, मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। प्रशासन की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पीहू को मुलाकात में शामिल क्यों नहीं किया गया और दूसरी बच्ची का चयन किस आधार पर हुआ।
