नई दिल्ली। संसद के दोनों सदन 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुके हैं, लेकिन 10 दिन बाद भी मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। रविवार सुबह तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। सामान्य तौर पर सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन से चार दिन के भीतर सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इस बार देरी के चलते राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े परिसीमन वाले प्रस्तावित बिल को लेकर है। माना जा रहा है कि सरकार औपचारिक सत्रावसान नहीं होने की स्थिति का इस्तेमाल करते हुए बिना नया सत्र बुलाए इस बिल को दोबारा संसद में ला सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बजट सत्र में नहीं हो पाया था पारित
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों के परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव सरकार बजट सत्र में पारित नहीं करा पाई थी। 17 अप्रैल को लोकसभा में इस मुद्दे पर मतदान हुआ था। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। इनमें 298 सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट किया था। प्रस्ताव को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी।
दक्षिणी राज्यों की ओर से लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्वितरण को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं। आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर दक्षिणी राज्यों की तुलना में अधिक आबादी वाले राज्यों की लोकसभा सीटों में ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।
सीटें 50% बढ़ाने का फॉर्मूला
दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार की ओर से लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार किए जाने की चर्चा है। इस व्यवस्था में सभी राज्यों की मौजूदा सीटों में समान अनुपात में बढ़ोतरी का प्रस्ताव हो सकता है।
फिलहाल संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में बिल को लेकर चल रही चर्चाओं पर सभी की नजर बनी हुई है।
