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ऑनलाइन सट्टा केस: ASI की विभागीय जांच पर रोक, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले से जुड़े एक अहम प्रकरण में स्पष्ट किया है कि आपराधिक केस और विभागीय जांच एक साथ नहीं चल सकती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने रायपुर में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) चंद्रभूषण वर्मा के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की सिंगल बेंच में हुई।

दरअसल, संतोषी नगर रायपुर निवासी चंद्रभूषण वर्मा के खिलाफ शिकायत के बाद रायपुर में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था और कोर्ट में चार्जशीट भी पेश की जा चुकी है। इसके बावजूद 26 सितंबर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर ने उसी मामले में विभागीय आरोप पत्र जारी कर जांच शुरू कर दी। इससे आहत होकर ASI चंद्रभूषण वर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हवाला दिया। इनमें कैप्टन एम. पॉल एन्थनी बनाम भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड, स्टेन्जेन टोयोटेस्यू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम गिरीश और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम नीलम नाग जैसे मामले शामिल हैं। इन फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित हो और आरोप व गवाह समान हों, तब विभागीय जांच नहीं की जा सकती।

वकीलों ने यह भी दलील दी कि यदि विभागीय जांच में पहले गवाहों के बयान दर्ज हो जाते हैं, तो इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है और पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है। हाईकोर्ट ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि आपराधिक केस लंबित रहने तक विभागीय जांच पर रोक आवश्यक है।

उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने FIR दर्ज की है। ED के अनुसार, ASI चंद्रभूषण वर्मा छत्तीसगढ़ में मुख्य लाइजनर की भूमिका निभा रहा था और दुबई स्थित प्रमोटर्स से हवाला के जरिए हर महीने बड़ी रकम लेता था। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह राशि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े लोगों तक भी पहुंचाई जा रही थी। इसी आधार पर EOW ने ASI वर्मा को आरोपी बनाया है।

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