पोस्टमार्टम के बाद शव वाहन नहीं मिला, 3 घंटे इंतजार के बाद कंधे पर शव ले गए परिजन

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। बरदुला जंगल में पेड़ पर लटके मिले बुजुर्ग के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद भी परिजनों को शव घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिल सका। करीब तीन घंटे तक एंबुलेंस और शव वाहन का इंतजार करने के बाद जब कोई व्यवस्था नहीं हुई तो परिजनों को बांस की बल्ली के सहारे शव को कंधे पर उठाकर घर ले जाना पड़ा।

मृतक की पहचान बेहराडीह निवासी सुमेर सिंह के रूप में बताई जा रही है। वे कमार जनजाति से थे। परिजनों के मुताबिक सुमेर सिंह करीब पांच दिनों से लापता थे। परिवार और ग्रामीणों ने उनकी तलाश की, जिसके बाद बरदुला के जंगल में उनका शव पेड़ पर लटका हुआ मिला। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शव को घर ले जाने के लिए वाहन का इंतजार करते रहे। बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे तक इंतजार करने के बावजूद शव वाहन या एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। आखिरकार परिजनों ने बांस की बल्ली के सहारे शव को उठाया और कंधे पर लेकर घर के लिए रवाना हुए।

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में शवों को अस्पताल से घर तक पहुंचाने की सुविधा को लेकर व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा शुरू हो गई है।

परिजनों का सवाल है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तो तीन घंटे तक इंतजार के बाद भी वाहन क्यों नहीं मिला? मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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