एनआईए का बड़ा खुलासा: पूर्वोत्तर में सक्रिय अमेरिकी-यूक्रेनी नेटवर्क का भंडाफोड़

दिल्ली। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मिजोरम सीमा पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त किया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने रूसी खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है।

इन पर टूरिस्ट वीजा की आड़ में भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने और म्यांमार के हथियारबंद विद्रोही गुटों को आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग देने का गंभीर आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, 14-15 लोगों का यह समूह यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन की तस्करी कर रहा था, जो भारतीय उग्रवादी समूहों तक पहुंच सकते थे।

मास्टरमाइंड मैथ्यू वैनडाइक और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक बताया जा रहा है। वैनडाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ का संस्थापक है और पूर्व में लीबिया के गृहयुद्ध, इराक में ISIS के खिलाफ लड़ाई और यूक्रेन युद्ध में सक्रिय रह चुका है।

एनआईए ने उसे कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा, जबकि अन्य यूक्रेनी नागरिक दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों से गिरफ्तार किए गए। ये आरोपी अवैध रूप से म्यांमार सीमा में घुसकर वहां विद्रोहियों को ड्रोन और आधुनिक युद्ध कौशल सिखाकर भारत लौटे थे। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्हें 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है।

पूर्वोत्तर में ‘ड्रोन वारफेयर’ का बढ़ता खतरा

सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता म्यांमार गृहयुद्ध में इस्तेमाल हो रही ड्रोन तकनीक का भारतीय उग्रवादियों तक पहुंचना है। म्यांमार के चिन स्टेट और अराकान आर्मी जैसे विद्रोही गुटों के संबंध भारत के उल्फा (I) और कुकी नेशनल आर्मी जैसे प्रतिबंधित संगठनों से हैं।

यदि विदेशी प्रशिक्षकों द्वारा दी गई यह ड्रोन टेक्नोलॉजी भारतीय उग्रवादियों के हाथ लगती है, तो यह असम, मणिपुर और मिजोरम की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। फिलहाल 8 अन्य यूक्रेनी नागरिकों की तलाश जारी है और पूरे पूर्वोत्तर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

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