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राष्ट्रीय मीडिया की बहसों पर रायपुर साहित्य उत्सव में मंथन

रायपुर। रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा “राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे” में मीडिया की मौजूदा दिशा, उसकी चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर गंभीर विमर्श हुआ। यह सत्र छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय रमेश नैयर को समर्पित रहा। परिचर्चा के सूत्रधार श्री वरुण सखा रहे, जिनके सवालों के माध्यम से संवाद आगे बढ़ा।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया में राजनीति का बढ़ता कवरेज एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने मीडिया आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा कि समयानुकूल नियमन और नीतियां पत्रकारों के हितों की रक्षा करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज प्राइम टाइम डिबेट के विषय सोशल मीडिया तय कर रहा है, ऐसे में पत्रकारों का संवेदनशील, अध्ययनशील और प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है।

वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में कहा कि राष्ट्रीय मीडिया नक्सल घटनाओं को तो प्रमुखता देता है, लेकिन सकारात्मक बदलावों और विकास कार्यों को अपेक्षित स्थान नहीं मिलता। उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका को पंचायत से संसद तक महत्वपूर्ण बताया।

वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी ने जमीनी पत्रकारिता के घटते दायरे पर चिंता जताते हुए कहा कि खर्चीली रिपोर्टिंग के बजाय प्रायोजित कंटेंट और डिबेट बढ़ रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी को भी गंभीर चुनौती बताया। परिचर्चा ने मीडिया में संतुलन, जिम्मेदारी और गुणवत्ता पर गहन सोच का अवसर दिया।

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