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म्यांमार साइबर गुलामी रैकेट का भंडाफोड़, MP में पहली बार एमिग्रेशन एक्ट में केस

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और ‘साइबर गुलामी’ रैकेट का पर्दाफाश किया है।

विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को बंधक बनाकर उनसे साइबर ठगी करवाने वाले इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि एमपी में पहली बार इस तरह के अपराध में एमिग्रेशन एक्ट के साथ मानव तस्करी और आईटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं।

झांसे से शुरू होकर बंधक बनने तक का सफर

जांच में सामने आया कि भोपाल के एक युवक को डेटा एंट्री जॉब और 30-40 हजार थाई बाथ सैलरी का लालच देकर जाल में फंसाया गया। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद उसे थाईलैंड भेजा गया, जहाँ से अवैध रूप से सीमा पार कराकर उसे म्यांमार के दुर्गम इलाकों में ले जाया गया। व

हां उसे एक साइबर ठगी गिरोह को ‘बेच’ दिया गया। युवक को बंधक बनाकर मारपीट की जाती थी और जबरन ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करवाई जाती थी। अंततः म्यांमार की सेना ने उसे मुक्त कराया।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और गिरफ्तारियां

साइबर पुलिस ने तकनीकी सुरागों के आधार पर दो एजेंटों को दबोचा है:

  • एक आरोपी की गिरफ्तारी बिहार से हुई है।
  • दूसरे आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर पकड़ा गया। इनके पास से मोबाइल, टैबलेट और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो इनके गहरे नेटवर्क की पुष्टि करते हैं।

सोशल मीडिया बना शिकार का हथियार

यह गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहता था। बेरोजगार युवाओं को टारगेट कर उन्हें फर्जी एचआर या होटल इंडस्ट्री के ऑफर दिए जाते थे। म्यांमार, लाओस और कंबोडिया की सीमाओं पर ऐसे कई ‘स्कैम सेंटर’ सक्रिय हैं, जहाँ भारत समेत 30 से अधिक देशों के युवाओं से गुलामी कराई जा रही है।

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