रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण, किसान को तहसील के चक्कर से मिली मुक्ति

ऑटोम्यूटेशन सुविधा से बचा समय, मुख्यमंत्री साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं में हुए तकनीकी सुधार
रायपुर। जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने और लंबे इंतजार की परेशानी अब कम हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के किसान अजीत राम साहू को रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही नामांतरण की सुविधा मिल गई। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के कारण उन्हें अलग से तहसील कार्यालय नहीं जाना पड़ा और उनका समय भी बचा।
अजीत राम साहू ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से बातचीत में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था। इसके लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता था। इस बार रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने से उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिली।
रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया जुड़ी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वत: आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय बेहतर हुआ है।
इस व्यवस्था से खासकर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल रही है। उन्हें नामांतरण के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों में जाने की जरूरत कम हो रही है।
ई-केवाईसी से बढ़ेगी पारदर्शिता
पंजीयन प्रक्रिया में आधार आधारित ई-केवाईसी की सुविधा भी लागू की गई है। इसके माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ पहचान संबंधी गड़बड़ियों की आशंका कम करने में मदद मिलती है।
अजीत राम साहू ने इस सुविधा के लिए सरकार के प्रति आभार जताया। उनका अनुभव बताता है कि तकनीक आधारित बदलावों से जमीन संबंधी कामकाज में लगने वाला समय और अनावश्यक कार्यालयीन प्रक्रिया कम हो सकती है।





