Chhattisgarh

साइबर ठगों के ब्रोकरो पर कार्रवाई, म्यूल अकाउंट और सिम देने वाले 19 आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर। साइबर ठगों की मदद करने वाले म्यूल बैंक खातों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इन खातों के जरिए 3 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। पुलिस ने 60 म्यूल बैंक खातों की जांच के बाद 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग ठगों को बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे।

बुधवार को बिलासागुड़ी में पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया। साइबर क्राइम पोर्टल, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। इन लोगों ने ठगों की मदद के लिए अपने बैंक खाते खोले और सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे।

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए 100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की 20 टीमें बनाई। इनमें कोटक महिंद्रा और एक्सिस बैंक के कर्मचारी भी शामिल थे। ठगों ने इन म्यूल खातों का इस्तेमाल फर्जी सिम कार्ड, शेयर ट्रेडिंग, क्रिप्टो करेंसी और अन्य साइबर अपराधों में किया। साइबर ठग दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर करते हैं। इसके बदले में खातेदार को मोटी रकम दी जाती है। पुलिस ने मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया और अधिकारियों के लिए पुरस्कार की घोषणा की।

क्या है म्यूल एकाउंट

साइबर ठगी करने वाले वसूली गई रकम अपने बैंक खातों में जमा नहीं कराते, इसके लिए वे दूसरों के बैंक एकाउंट का उपयोग करते हैं। इसके एवज में खातेदार को मोटी रकम दी जाती है। बैंक अकाउंट, डिजिटल वॉलेट या अन्य वित्तीय माध्यमों का उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम या अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने में करते हैं। ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए उनको बैंक खाते या वॉलेट की जरूरत पड़ती है।

सेविंग व करंट खाते के लिए 1 लाख तक दे रहे ठग

दूसरे राज्यों में खाता उपलब्ध कराने वालों को सायबर ठग मोटी रकम देते हैं। छत्तीसगढ़ में उनका काम सस्ते में हो रहा था। यहां उनसे जुड़े लोगों को ठग रोज सुबह नए एकाउंट और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने पर खाते के लिए हजार से दो हजार और सिम के लिए 500 से हजार रुपए देते थे। जबकि दूसरे राज्यों में सेविंग खाते के लिए 25 हजार और करंट एकाउंट पर 1 लाख रुपए देना पड़ रहा था।

Related Articles

Back to top button