अब मेनू में ‘पनीर’ नहीं, ‘एनालॉग’ लिखना होगा: नकली पनीर पर सख्ती, फूड विभाग का बड़ा फैसला

रायपुर। रायपुर और भिलाई समेत छत्तीसगढ़ में होटल-ढाबों में परोसे जा रहे ‘पनीर’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक जिन डिशेज को लोग पनीर बटर मसाला या पनीर टिक्का समझकर खा रहे थे, उनमें असली पनीर नहीं बल्कि ‘एनालॉग’ इस्तेमाल हो रहा था। इस पर सख्ती करते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है।

अब यदि होटल या ढाबा दूध से बने असली पनीर का उपयोग नहीं करता है, तो उसे अपने मेनू में ‘पनीर’ शब्द हटाकर ‘एनालॉग’ लिखना होगा। यानी अब ‘पनीर बटर मसाला’ की जगह ‘एनालॉग बटर मसाला’ और ‘पनीर टिक्का’ की जगह ‘एनालॉग टिक्का’ लिखना अनिवार्य होगा।

दरअसल, बाजार में स्किम्ड मिल्क पाउडर, फैट और सोयाबीन ऑयल से बने एनालॉग उत्पाद बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। दिखने और स्वाद में यह पनीर जैसा ही लगता है, इसलिए आम लोग फर्क नहीं कर पाते। इसी भ्रम को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

खाद्य नियंत्रक दीपक अग्रवाल के अनुसार, केवल वही होटल अपने मेनू में ‘पनीर’ लिख सकेंगे, जो वास्तव में दूध से बने पनीर का उपयोग कर रहे हों। अन्यथा उन्हें स्पष्ट रूप से ‘एनालॉग’ लिखना होगा, ताकि ग्राहकों को सही जानकारी मिल सके।

हाल ही में रायपुर के भाठागांव में एक फैक्ट्री से 1200 किलो नकली पनीर जब्त किया गया था। वहां पाम ऑयल, पाउडर और अन्य केमिकल्स से पनीर जैसे उत्पाद बनाए जा रहे थे। इस कार्रवाई के बाद विभाग और सख्त हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्धारित मानकों के भीतर बना एनालॉग पूरी तरह हानिकारक नहीं होता, लेकिन अधिक मात्रा में या गलत तरीके से बने उत्पाद स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

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