StateNewsदेश - विदेश

CCTV नेटवर्क पर बड़ा खतरा: पाकिस्तान जा रहे थे फुटेज, अब होगी देशभर में जांच

दिल्ली। भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गाजियाबाद में पकड़े गए एक जासूसी रैकेट की जांच में सामने आया है कि संवेदनशील इलाकों में लगे CCTV कैमरों का लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान भेजा जा रहा था। इस खुलासे ने देश के निगरानी तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चीन निर्मित कैमरों से डेटा चोरी का जोखिम
भारत में वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80% CCTV कैमरे चीन निर्मित हैं। इन कैमरों के सर्वर अक्सर विदेशों में होते हैं, जिससे डेटा चोरी और जासूसी का खतरा बना रहता है। गाजियाबाद के मामले में पाया गया कि सोलर पावर से चलने वाले छोटे कैमरे इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से जुड़े थे, जिनका एक्सेस सीमा पार बैठे हैंडलर्स के पास था।

1 अप्रैल से नए सुरक्षा मानक (STQC सर्टिफिकेशन)
सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से बाजार में केवल वही कैमरे बिक सकेंगे जो STQC (स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन) द्वारा प्रमाणित होंगे। वर्तमान में केवल 7 कंपनियों के 53 मॉडलों को ही ‘हैकिंग-प्रूफ’ और सुरक्षित माना गया है। गृह मंत्रालय और आईबी मिलकर देशभर के CCTV नेटवर्क का ऑडिट शुरू करने जा रहे हैं।

प्राइवेसी और कानूनी नियम
सिर्फ जासूसी ही नहीं, बल्कि आम लोगों की निजता (Privacy) भी खतरे में है। डेटा प्रोटेक्शन कानून 2023 के तहत कुछ जरूरी नियम स्पष्ट किए गए हैं।

नोटिस बोर्ड: जहां कैमरा लगा है, वहां “आप CCTV की निगरानी में हैं” का बोर्ड अनिवार्य है।

सोशल मीडिया: CCTV फुटेज को सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर डालना कानूनी अपराध है।

पड़ोसी की निजता: कैमरा किसी पड़ोसी के घर की तरफ नहीं लगाया जा सकता।

डेटा स्टोरेज: फुटेज को अधिकतम 90 दिनों तक सुरक्षित रखना होता है।

Related Articles

Back to top button