महानदी जल विवाद: ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ा, 2027 में फैसले की उम्मीद

रायपुर। महानदी के जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच चल रहे लंबे विवाद में एक बार फिर समयसीमा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ाकर 13 जनवरी 2027 तक कर दिया है। अब इस बहुप्रतीक्षित मामले में 2027 की शुरुआत में फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह विवाद करीब 44 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। उस समय छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं था और मामला मध्य प्रदेश व ओडिशा के बीच था। बाद में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद यह विवाद दोनों राज्यों के बीच जारी रहा। कई दौर की बातचीत और समझौते हुए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
वर्ष 2016 में विवाद ने तूल पकड़ा, जब ओडिशा सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत मामला आगे बढ़ा और 12 मार्च 2018 को ट्रिब्यूनल का गठन किया गया। इससे पहले 2017 में एक नेगोशिएशन कमेटी बनाई गई थी, लेकिन ओडिशा की असहमति के चलते बातचीत विफल रही।
ट्रिब्यूनल के कामकाज में भी कई बार बाधाएं आईं। अध्यक्ष के इस्तीफे, कोरम की कमी और कोविड-19 महामारी के कारण सुनवाई प्रभावित हुई, जिससे समयसीमा बार-बार बढ़ानी पड़ी। इस दौरान ट्रिब्यूनल की टीम ने रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जिलों का दौरा कर महानदी और हसदेव नदी से जुड़ी परियोजनाओं का निरीक्षण किया और तकनीकी जानकारी जुटाई।
महानदी दोनों राज्यों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। छत्तीसगढ़ में जहां यह सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत है, वहीं ओडिशा में कृषि, उद्योग और बिजली उत्पादन इसके पानी पर निर्भर हैं।
ऐसे में ट्रिब्यूनल का फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। अब बढ़े हुए समय के साथ उम्मीद है कि 2027 में इस लंबे विवाद का स्थायी समाधान सामने आ सकेगा।





