नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों की जिंदगी अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। कभी बंदूक थामने वाले हाथ अब ट्रैक्टर का स्टीयरिंग पकड़ रहे हैं। जिला प्रशासन की पहल पर लाइवलीहुड कॉलेज स्थित पुनर्वास केंद्र में रह रहे पुनर्वासित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर चलाने और उसकी मरम्मत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशासन के मुताबिक, पुनर्वास केंद्र में रह रहे 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों को लोकतंत्र और मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 8 लोगों को नए वोटर आईडी कार्ड वितरित किए गए हैं, जबकि 25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन पूरा हो चुका है। इसके अलावा 40 लोगों से फॉर्म-6 भरवाकर उन्हें मतदाता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
हाल ही में कलेक्टर ने पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान पुनर्वासित लोगों ने ट्रैक्टर चलाना सीखने और उसके रखरखाव का प्रशिक्षण देने की मांग रखी। खास बात यह रही कि इनमें कई लोग ऐसे थे, जिन्होंने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी।
कलेक्टर ने उनकी इच्छा को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। सोमवार से लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रैक्टर प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। इसमें ड्राइविंग के साथ-साथ ट्रैक्टर की तकनीकी जानकारी और रिपेयरिंग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।
प्रशासन का मानना है कि यह सिर्फ कौशल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। इससे पुनर्वासित लोगों को रोजगार और आजीविका का मजबूत साधन मिलेगा।
पुनर्वास केंद्र में अब बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां डर और अस्थिरता का माहौल था, वहीं अब लोगों के चेहरों पर आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद नजर आ रही है। नारायणपुर का यह केंद्र अब नई शुरुआत और बदलाव की मिसाल बनता जा रहा है।
