झारखंड के अफीम सिंडिकेट का छत्तीसगढ़ में ‘लैंडिंग’: 13 साल की बच्चियों से 300 में कराई मजदूरी

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला अब अफीम की अवैध खेती के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के केंद्र के रूप में उभर रहा है। दुर्ग के बाद बलरामपुर के त्रिपुरी पंचायत में 3.67 एकड़ और तुर्रीपानी में 1.5 एकड़ खेत में लहलहाती अफीम की फसल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस काले कारोबार की जड़ें झारखंड से जुड़ी हैं और इसमें मासूम बच्चियों का शोषण किया जा रहा है।

नाबालिग के अपहरण से खुली पोल
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अफीम के खेत में मजदूरी करने वाली एक 13-14 साल की नाबालिग लड़की गायब हो गई। उसे खेत का चौकीदार भगाकर रांची ले गया था। आरपीएफ की पूछताछ के बाद जब लड़की गांव लौटी, तब पंचायत बैठी और अफीम की खेती का राज खुला। ग्रामीणों ने बताया कि खेत में काम करने के लिए नाबालिगों को 300 रुपए दिहाड़ी पर रखा जाता था।

2 करोड़ की फसल, 100 मजदूरों ने 1 घंटे में उजाड़ी
बुधवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 100 मजदूरों ने महज एक घंटे के भीतर 4 महीने की मेहनत से तैयार अफीम की फसल को उखाड़ दिया। जब्त अफीम की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए आंकी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व रिकॉर्ड (डिजिटल सर्वे) में यह जमीन ‘पड़त’ या ‘अन्य अनाज’ के नाम पर दर्ज थी, जबकि वहां जहर की खेती हो रही थी।

झारखंड का ‘शिफ्टिंग’ नेटवर्क
जानकारों के मुताबिक, झारखंड में पुलिस की सख्ती के बाद अफीम माफिया ने सुरक्षित ठिकाने के रूप में छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती घने जंगलों को चुना है। यहां स्थानीय रसूखदारों की मदद से जमीन लीज पर ली जाती है और झारखंड के विशेषज्ञ ‘चौकीदार’ बनकर पूरी फसल की निगरानी करते हैं। इस मामले में 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

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