रायपुर साहित्य उत्सव में ‘जशप्योर’ का जलवा: महुआ और मिलेट्स से बने उत्पादों को मिली शानदार प्रतिक्रिया

महिला स्वावलंबन की सशक्त कहानी लिख रहा जशप्योर
रायपुर। रायपुर में आयोजित साहित्य उत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और संस्कृति के साथ जशपुर जिले का गृह ब्रांड ‘जशप्योर’ (Jashpure) आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मुख्यमंत्री के आदिवासी और महिला उत्थान के विजन से प्रेरित यह ब्रांड पारंपरिक स्वादों को आधुनिक बाजार से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
उत्सव परिसर में लगे जशप्योर स्टॉल पर दिनभर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खासतौर पर महुआ से बने लड्डू, कुकीज़ और कैंडी लोगों के बीच आकर्षण का विषय बने रहे।
स्टॉल पर मौजूद QR कोड के माध्यम से आगंतुक न केवल उत्पादों के पोषण मूल्य बल्कि उनकी निर्माण प्रक्रिया की जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं। यह पारदर्शिता उपभोक्ताओं के बीच भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ा रही है।
रायपुर की स्थानीय निवासी निधि साहू ने कहा, “महुआ से बने इतने स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद देखकर सुखद आश्चर्य हुआ। यह हमारे पारंपरिक ज्ञान का आधुनिक रूप है।”
जशप्योर से जुड़े युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि महुआ को लेकर वर्षों से समाज में सीमित धारणा रही है, लेकिन अब जशपुर की महिलाएं इसे पारंपरिक सुपरफूड के रूप में स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल आदिवासी महिलाओं के ज्ञान को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।
विविधता और आधुनिकता का संगम
जशप्योर ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में 90 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। महुआ के साथ-साथ रागी, कुटकी, कोदो और बकव्हीट जैसे मिलेट्स से बने ग्लूटेन-फ्री उत्पाद भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण की नई पहचान
जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि महिला स्वावलंबन की प्रेरक पहल है। स्थानीय संसाधनों से रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देते हुए यह ब्रांड छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन रहा है।





