जांजगीर-चांपा

Janjgir-Champa: यहां तो पूरा सिस्टम ही गड़बड़ है …बीएमओ की कार्यशैली से परेशान है जनता…चर्चाओं ही चर्चाओं में क्या कह डाला साहब ने…पढ़िए

मालखरौदा। (Janjgir-Champa) आपदा को अवसर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे यहां के जिम्मेदार कोरोना काल में कोरोना से निपटने के लिए सरकार  करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं .लेकिन सरकार के उन्हें योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं उनके ही विभाग के अधिकारी जिनके ऊपर  कोरोना से निपटने की जिम्मेदारी है. (Janjgir-Champa) जिले के चर्चित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा यहां के बी एम ओ साहब आपदा का असर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

(Janjgir-Champa) दरअसल जिले के बहुचर्चित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा जो हमेशा से सुर्खियों में रहता है और सुर्खियों में रहने का कारण यहां के बीएमओ न जाने यहां की बीएमओ पद में ऐसी कौन सी शक्ति आ जाती है .कि जो भी चिकित्सक इस पद पर बैठे हैं। वह अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। वर्तमान में जुगाड़ के बीएमओ यानी अन्य जगह पर पदस्थ चिकित्सक को मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अटैच कर उन्हें खंड चिकित्सा अधिकारी जैसे अहम पद को दे दिया जाता है। कोरोना काल के दौरान खंड चिकित्सा अधिकारी की लापरवाही का नतीजा क्षेत्र की जनता भुगत रहे हैं . आपको बता दें कि मालखरौदा में आए दिन एंटीजन  की कमी मरीजों का कांटेक्ट ट्रेसिंग न होना, जांच स्थल पर पर्याप्त संसाधन का ना होना, वहीं पर जांच  स्थल का भी लगातार सेनेटाइज न किए जाने की वजह से संक्रमण होने का भी खतरा बना रहता है। इस संदर्भ में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ रविंद्र सिदार को मीडिया के द्वारा कई बार अवगत कराया भी गया। बावजूद इसके बीएमओ द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। वही खंड चिकित्सा अधिकारी के कार्यशैली पर भी सवाल उठता है ना तो इनके द्वारा मीडिया को जवाब देना  है। न ही जनप्रतिनिधियों को कहीं ना कहीं अपनी गलती को छुपाने के लिए वह मीडिया से दूरी बनाकर खुद को बचाते नजर आते हैं.

बीएमओ की कार्यशैली से हर कोई परेशान

बीएमओ के द्वारा मौखिक आदेश से यहां हर कोई परेशान है मरीज rt-pcr जांच के लिए जाते हैं तो उन्हें सही समय पर रिपोर्ट नहीं मिल पाता और जब रिपोर्ट नहीं मिल पाता तो बीएमओ इलाज के लिए साफ मना कर देते हैं। ऐसे में मरीज आखिर जाए तो जाए कहां। तो वही आए दिन एंटीजन कमी बनी रहती है . वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीएमओ कार्यशैली से यहां के कर्मचारी भी परेशान है। क्योंकि कर्मचारियों का कहना है कि बीएमओ द्वारा उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ना दिया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों ने नाम न बताने की शर्त में कहा कि बीएमओ ना तो फील्ड में जाते हैं ना ही कार्यस्थल पर वह अपने कमरे में ही बैठे-बैठे दिशा निर्देश देते रहते हैं। संसाधन की कमी होने की समस्या को बार-बार अवगत  कराने के बावजूद भी बीएमओ उस पर कभी भी ध्यान नहीं देते। बल्कि जो कर्मचारी उन्हें संसाधनों की कमी के बारे में बताते हैं। उनको वह टारगेट में उनको मानसिक प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं। ऐसे अवस्थाओं के बीच कोरोना योद्धा कैसे कोरोना को मात देंगे.

वाह बीएमओ साहब अपनों पर रहम तो गैरों पर सितम

वही खंड चिकित्सा अधिकारी के कुछ चाहते कर्मचारियों को वह अस्पताल के बाजू में स्थित सरकारी निवास पर बैठकर दिन भर समय तो काट देते हैं। उन्हें किसी भी प्रकार की कार्य की जिम्मेदारी नहीं होती . लेकिन वही अन्य कर्मचारियों के ऊपर बीएमओ द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ित किया जा रहा है । है जो कर्मचारी दिन रात बिना छुट्टी काम करते हैं। अगर वह थोड़ी देर के लिए लेट क्या हो जाए तो बीएमओ साहब आगबबूला होकर उन्हें सेवा समाप्ति की धमकी और स्पष्टीकरण का आदेश निकालते हैं .तो वहीं चाहते कर्मचारी जब ड्यूटी में ना आए तो उनके लिए दूध भात ना उन्हें जिम्मेदारी का टेंशन ना मरीजों के हित का. वही जो निरंतर काम करने वाले कर्मचारी हैं जो मन लगा कर दिन रात लोगों की सेवा में समर्पित है। अगर उन्हें प्रताड़ित किया जाए तो ऐसे में कोरोना की जंग कैसे जीती जा सकती है.

मुझे सीएमएचओ साहब ने फ्री हैंड दिया है मुझे जो करना है मैं करूंगा

वर्तमान के हालात को देखते हुए जब हमने खंड चिकित्सा अधिकारी रविंद्र सिदार से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया लेकिन जब उन्हें हमने उनसे उनका पक्ष जानने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उनके कार्यालय पहुंचे तो साहब वहां मौजूद नहीं थे। फिर जब हमने अस्पताल के कर्मचारियों से पूछा कि साहब कहां है उन्होंने बताया कि साहब बाजू में जो सरकारी निवास है .वहां पर हैं। फिर हम वहां जाकर जब साहब से बात की तो साहब अपने अजीबोगरीब बयान देते हुए कहे कि मुझे सीएमएचओ साहब ने फूल छूट दे कर रखा है। मेरी जैसी मर्जी होगी मैं वैसा काम करूंगा। मुझे सिखाने की किसी की जरूरत नहीं है। ना तो मैं मीडिया से डरता हूं। ना नेताओं से और एंटीजन किट कमी है तो मुझे क्यों बोल रहे हो। सरकार से बोलो ना ऊपर के अधिकारियों को बोलो मैं तो खुद यहां पर आना नहीं चाहता था। मुझे जबरदस्ती यहां भेजा गया है . तब हमने कहा कि सर हम आपके क्या बयान लिखें तो उनका कहना है जो छापना है छाप दो.

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