छत्तीसगढ़

बच्चों के बीच पहुँचकर जनक ने मनाया बाल दिवस, समझाया बच्चों को बाल दिवस का महत्व

रवि तिवारी@देवभोग…आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव आज बाल दिवस के मौक़े पर सरगीगुड़ा के प्राथमिक शाला पहुँचे.. इस दौरान उन्होंने बच्चों को चॉकलेट और पेन बाँटकर बच्चों के बीच बाल दिवस मनाया.. बच्चों को सम्बोधित करते हुए जनक ने कहा कि हर साल 14 नवंबर को पूरे भारत में बाल दिवस मनाया जाता है। इस दिन को भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू जयंती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है..

उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को पूरे भारत में बाल दिवस मनाया जाता है। श्री ध्रुव ने कहा कि नेहरू बच्चों के अधिकार और एक समावेशी शिक्षा प्रणाली के लिए एक महान समर्थक थे, जहां ज्ञान सभी के लिए सुलभ हो। उनका मानना ​​था कि बच्चे देश का भविष्य और समाज की नींव हैं, और इसलिए, सभी की भलाई का ध्यान रखा जाना चाहिए।

वहीं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के महामंत्री अरुण सोनवानी ने कहा कि पंडित नेहरू को अक्सर प्यार से चाचा नेहरू के नाम से भी बुलाया जाता था। हर वर्ष स्कूलों में बाल दिवस मनाया जाता है,और बच्चों के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। हालांकि 1964 से पहले 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता था क्योंकि यूनाइटेड नेशंस इसी दिन को वर्ल्ड चिल्ड्रन डे के रूप में मनाता था। लेकिन नेहरू जी की मृत्यु के बाद संसद में प्रस्ताव पारित किया गया जिसके अनुसार उनके जन्मदिन को हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

वहीं युवा कांग्रेस के विधानसभा महासचिव भविष्य प्रधान ने कहा कि चाचा नेहरू के रूप में जाने जाने वाले जवाहरलाल नेहरू का मानना ​​था कि बच्चे देश का भविष्य और समाज की नींव हैं। नेहरू की जयंती के अलावा, बाल दिवस बच्चों की शिक्षा, अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और यह देखने के लिए भी मनाया जाता है कि सभी के लिए उचित देखभाल उपलब्ध है।

भविष्य ने कहा कि बाल दिवस पूरे देश में एक मनमोहक अंदाज में मनाया जाता है। यह वह दिन है जब बच्चों को ढेर सारा प्यार, उपहार और लाड़ प्यार दिया जाता है। बाल दिवस स्कूलों में मनाया जाता है, जहाँ शिक्षक बच्चों के लिए कार्यक्रम और मनोरंजक प्रदर्शन करते हैं, जिन पर उपहारों की बौछार की जाती है, जिसमें खाने की चीज़ें, किताबें और कार्ड शामिल होते हैं।

भारत में बाल दिवस एक बहुप्रतीक्षित दिन है, क्योंकि छात्र अपने शिक्षकों को उनके मनोरंजन के लिए स्कूलों में प्रदर्शन करते देखने के लिए उत्सुक हैं। ज्ञात हो कि कोरोनावायरस महामारी के पहले दो वर्षों के दौरान, कई स्कूलों ने जूम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे समारोह का आयोजन किया था ।

वहीं अब लॉकडाउन हटने और अब स्कूल फिर से खुलने के साथ, हम बच्चों की सुरक्षा, भलाई और शिक्षा के महत्व का निरीक्षण कर सकते हैं, विशेष रूप से वे जो महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। तो, इस बाल दिवस, आइए हम सीखने को सक्षम करें, बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और उनकी भलाई सुनिश्चित करें। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख रूप से प्रधानपाठक जोगेश जायसवाल, शाला समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र ठाकुर, घनश्याम मांझी, देवसिंह नेताम भी प्रमुख रूप से मौज़ूद रहे…

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