भारत को मिली पहली ओपन LGBTQ सांसद,मेनका गुरुस्वामी ने रचा इतिहास

दिल्ली। भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक पल आया है, जब सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी देश की पहली ओपन LGBTQ सांसद बन गई हैं। उन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। उनका संसद तक पहुंचना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि LGBTQ समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिए भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मेनका गुरुस्वामी एक प्रसिद्ध संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने 2018 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में अहम भूमिका निभाई थी। इस फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के कुछ हिस्सों को निरस्त किया गया, जिससे समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। इस निर्णय ने भारत में LGBTQ अधिकारों को नई दिशा दी।

1974 में हैदराबाद में जन्मीं मेनका ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड लॉ स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने येल, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और टोरंटो विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में भी पढ़ाया है। उनके करियर में ‘राइट टू एजुकेशन’ जैसे अहम मामलों में भी योगदान रहा है।

उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही है। मेनका गुरुस्वामी की पार्टनर अरुंधति काटजू हैं, जो खुद भी एक जानी-मानी वकील हैं। दोनों ने मिलकर धारा 377 के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। 2013 में हार के बाद भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा और 2018 में ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस उपलब्धि के बाद दोनों को TIME मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल किया गया।

मेनका का सांसद बनना भारत में समानता, अधिकार और समावेशिता की दिशा में एक मजबूत संकेत है। यह न केवल LGBTQ समुदाय के लिए प्रेरणा है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बदलती सोच को भी दर्शाता है।

Exit mobile version