रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नई ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। योजना को प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से लागू करने के लिए रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने की। इसमें भारतीय खाद्य निगम, मार्कफेड, छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन और प्रदेशभर के राईस मिलर्स शामिल हुए।
कार्यशाला में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से लागू होने वाली ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के विभिन्न प्रावधानों, गुणवत्ता मानकों, भंडारण व्यवस्था और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत चावल की गुणवत्ता सुधारने और मिलिंग प्रक्रिया को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
खाद्य सचिव Reena Babasaheb Kangale ने कहा कि योजना के सफल संचालन के लिए प्रदेश की राईस मिलों को तकनीकी रूप से अपग्रेड करना जरूरी होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मिलर्स द्वारा रखे गए सुझावों और व्यवहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाएंगे।
कार्यशाला में 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल और 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के गुणवत्ता मानकों की भी जानकारी दी गई। मिलर्स ने उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, एफसीआई में रैक मूवमेंट तेज करने और मिलिंग लागत में बढ़ोतरी जैसे मुद्दे उठाए।
छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिलाल बोहरा, महामंत्री विष्ण बिंदल अन्य प्रतिनिधियों ने योजना के सफल क्रियान्वयन में सहयोग का भरोसा दिलाया। कार्यशाला में मार्कफेड के एमडी जितेंद्र शुकला और एफसीआई के जीएम दीपक शर्मा सहित 60 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
