I-PAC रेड विवाद: ममता पर पावर के गलत इस्तेमाल का आरोप, ED बोली- CM के फायदे के लिए पुलिस ने डाली जांच में रुकावट

दिल्ली। I-PAC रेड विवाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है।
एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कथित कोयला चोरी घोटाले की जांच के दौरान I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर की गई रेड में मुख्यमंत्री और राज्य की मशीनरी ने गैर-कानूनी तरीके से दखल दिया। ED का आरोप है कि यह सब मुख्यमंत्री के निजी फायदे के लिए किया गया और इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।
ED ने कहा कि 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई छापेमारी के दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानबूझकर एजेंसी के काम में बाधा डाली।
PMLA कानून के तहत कार्रवाई कर रहे अधिकारियों को रोका गया, उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण छीने गए और जरूरी दस्तावेज जबरन अपने कब्जे में ले लिए गए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुंचीं और पुलिस बल के साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन में हस्तक्षेप किया।
ED के अनुसार, इस दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे, जिन्हें बाद में जबरन ले जाया गया।
इससे जांच में बाधा उत्पन्न हुई और जरूरी डिजिटल डाटा की बैकअप प्रक्रिया भी बीच में ही रोक दी गई। एजेंसी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी यह दर्शाती है कि राज्य की मशीनरी ने ताकत और संख्या बल का इस्तेमाल कर केंद्रीय एजेंसी के काम को रोका।
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार का दावा है कि एजेंसी के रूप में कुछ हथियारबंद लोगों को बिना अनुमति तलाशी लेने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया गया था।
हालांकि, ED ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनके अधिकारियों ने अपने पहचान पत्र दिखाए थे और पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।
इस पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 मार्च तक टाल दी है। इससे पहले कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा जांच में दखल देना बेहद गंभीर विषय है और इसकी गहन जांच जरूरी है।





