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राजधानी में इंसानी रेबीज ‘नोटिफायबल डिजीज’ घोषित: हर केस की जानकारी देनी होगी, 2025 में डॉग बाइट के 35 हजार मामले

दिल्ली। दिल्ली सरकार ने इंसानों में होने वाले रेबीज को अब ‘नोटिफायबल डिजीज’ घोषित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि रेबीज का कोई भी संदिग्ध या कन्फर्म केस सामने आते ही उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और निजी डॉक्टरों को ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करनी होगी।

दिल्ली सरकार का कहना है कि इस फैसले से रेबीज के मामलों पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी और मरीजों के इलाज में देरी नहीं होगी। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेबीज से होने वाली एक भी मौत स्वीकार्य नहीं है। यह एक जानलेवा बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर इलाज मिलने पर इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। सरकार कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए ‘स्टेट एक्शन प्लान फॉर रेबीज एलिमिनेशन’ भी तैयार कर रही है।

दिल्ली नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में राजधानी में रेबीज के 49 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि कुत्तों के काटने के 35,198 मामले सामने आए। वहीं केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 2022 से 2024 के बीच दिल्ली में रेबीज से कोई मौत नहीं हुई, लेकिन एक RTI के जवाब में इस अवधि में लगभग 18 मौतों की जानकारी सामने आई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में हर साल करीब 59 हजार लोग रेबीज से मरते हैं, जिनमें से लगभग 20 हजार मौतें भारत में होती हैं। भारत में 60% से ज्यादा मामले और मौतें 15 साल से कम उम्र के बच्चों में होती हैं।

रेबीज एक वायरल संक्रमण है, जो कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने, खरोंच या उनकी लार के खुले जख्म से संपर्क में आने पर फैलता है। यह वायरस ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। शुरुआती लक्षणों में काटने की जगह पर जलन, खुजली, बुखार और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। बाद में पानी देखकर डर लगना, हवा से घबराहट और भ्रम जैसे लक्षण दिखते हैं। समय पर टीका और इलाज न मिलने पर मरीज कोमा में जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।

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