बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत आरक्षित सीटों में अचानक आई कमी को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए स्पष्टीकरण मांगा है कि आरटीई की सीटें 85 हजार से घटकर 55 हजार कैसे रह गईं।
सीटों के आंकड़ों में विरोधाभास
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। वर्तमान सुनवाई में सरकार की ओर से संयुक्त सचिव ने जानकारी दी कि आगामी सत्र 2026-27 में कुल 54,875 छात्रों को लाभ मिलेगा।
सरकार का तर्क है कि आरटीई कानून 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए है, इसलिए प्री-प्राइमरी स्तर पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने इस तर्क और सीटों में लगभग 30 हजार की कटौती पर गहरा असंतोष जताया है।
निजी स्कूलों की मनमानी और अनियमितताएं
सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों (जैसे नारायणा टेक्नो और ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल) की गंभीर अनियमितताओं का मुद्दा भी उठा। इन स्कूलों पर सीबीएसई संबद्धता का गलत दावा करने, मनमानी फीस वसूलने और विरोध करने वाले अभिभावकों को आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देने जैसे आरोप लगे हैं।
हाईकोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए शिक्षा विभाग को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें सरकार को सभी बिंदुओं पर बिंदुवार स्पष्टीकरण देना होगा।
