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मध्य प्रदेश में गहराया गैस संकट: शादियों की दावत और रोजगार पर मंडराया खतरा

दिल्ली। इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलमार्ग से गैस सप्लाई बाधित होने का सीधा असर अब मध्य प्रदेश की रसोई और कारोबार पर दिखने लगा है। राज्य के प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक आयोजनों में हड़कंप मचा है।

50 हजार शादियों पर संकट
प्रदेश में शादियों का सीजन चरम पर है और अनुमान के मुताबिक लगभग 50,000 शादियाँ होने वाली हैं। कमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण कैटरर्स के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

जुर्माने का डर: खुले में भट्ठी जलाने पर प्रशासन द्वारा 10,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

महंगाई की मार: कालाबाजारी के कारण जो सिलेंडर मिल रहे हैं, उनकी कीमत 2200 रुपये तक पहुँच गई है।

होटल, रेस्टोरेंट और टिफिन सेंटर बेहाल

होटल एसोसिएशन के अनुसार, हजारों रेस्टोरेंट और टिफिन सेंटर बंद होने की कगार पर हैं।

छात्रों की परेशानी: अकेले भोपाल में करीब 25,000 छात्र टिफिन सेंटरों पर निर्भर हैं। गैस न होने से उनके भोजन पर संकट खड़ा हो गया है।

फूड डिलीवरी: लगभग 7,000 डिलीवरी पार्टनर्स के रोजगार पर खतरा है क्योंकि रेस्टोरेंट ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं।

सरकार का रुख और नए नियम

हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। गैस आपूर्ति को चार श्रेणियों में बांटा गया है:

घरेलू रसोई (PNG/CNG): इनकी सप्लाई पूरी तरह सामान्य रहेगी।

छोटे बिजनेस और होटल: इन्हें पुरानी खपत का करीब 80% कोटा ही मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और जनता को अफवाहों से बचना चाहिए। हालांकि, जमीनी स्तर पर होटल संचालक मुख्यमंत्री से मिलकर ‘इमरजेंसी सर्विस’ का दर्जा देने की मांग करने की तैयारी में हैं।

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