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जल संरक्षण से आजीविका तक: ‘आजीविका डबरी’ अभियान बना ग्रामीण बदलाव की धुरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत आजीविका को मजबूत करने की दिशा में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत एक नई और प्रभावी पहल सामने आई है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत प्रदेशभर में ‘आजीविका डबरी’ यानी फार्म पोंड निर्माण का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। बारिश से पहले 10 हजार से अधिक आजीविका डबरी के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।

इस अभियान की खास बात यह है कि आजीविका डबरी का निर्माण समाज के कमजोर वर्ग के हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जा रहा है।

इससे एक ओर वर्षा जल का संरक्षण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों और ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालीन एवं टिकाऊ आजीविका के साधन मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को प्राथमिकता देकर जल संसाधन और आवास आधारित आजीविका को एकीकृत रूप से सशक्त किया जा रहा है।

मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार सृजन के साथ-साथ इस पहल से कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य जल आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रत्येक आजीविका डबरी का निर्माण 20 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर के मानक आकार में किया जा रहा है। जल की गुणवत्ता और टिकाऊपन के लिए इनलेट-आउटलेट व्यवस्था और सिल्ट अरेस्टिंग चैंबर अनिवार्य रूप से बनाए जा रहे हैं।

अभियान में पंचायतों और समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक चर्चा, हितग्राही चयन में पारदर्शिता और अंशदान की व्यवस्था से स्वामित्व की भावना मजबूत हो रही है। सैटेलाइट आधारित क्लार्ट ऐप के माध्यम से ‘रिज-टू-वैली एप्रोच’ पर वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जा रहा है।

तीन लाख रुपये तक की लागत वाली यह पहल निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रही है।

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