पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन

दिल्ली। पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और पश्चिम बंगाल के अनुभवी नेता मुकुल रॉय का लंबी बीमारी के बाद 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मुकुल रॉय का निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण रविवार रात 1:30 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में हुआ। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इस खबर की पुष्टि की है।
मुकुल रॉय ने बंगाल की राजनीति में लंबा और प्रभावशाली करियर बनाया। वे लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रमुख नेता रहे और कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल थे।
उनकी रणनीतिक सोच और राजनीतिक सूझ-बूझ के कारण उन्हें बंगाल की राजनीति का “चाणक्य” कहा जाता था।
2017 में मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बना कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा। उसी वर्ष के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए।
हालांकि, जून 2021 में उन्होंने फिर तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर बंगाल की राजनीतिक धारा में अपना स्थान बनाए रखा।
मुकुल रॉय का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव और रणनीति के उदाहरणों से भरा रहा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और अनुभवी नेता का अंत हो गया है।
राज्य और केंद्र की कई राजनीतिक हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उनके करीबी सहयोगियों और समर्थकों ने उन्हें एक कुशल नेता और ममता बनर्जी के विश्वासपात्र के रूप में याद किया।
मुकुल रॉय का जीवन बंगाल की राजनीति की बदलती दिशा और रणनीतियों का प्रतिबिंब था। उनके राजनीतिक योगदान और अनुभव को पार्टी और राज्य की राजनीति में हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा में राजनीतिक और सामाजिक जीवन के कई दिग्गज शामिल हुए और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।





