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पूर्व RAW चीफ सूद बोले– पाकिस्तान के साथ शांति संभव नहीं, कश्मीर उनके लिए जिहाद

दिल्ली। पूर्व रॉ प्रमुख विक्रम सूद ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान के मौजूदा रवैये को देखते हुए उसके साथ शांति की कोई वास्तविक संभावना नहीं दिखती।

उन्होंने साफ कहा कि इस्लामाबाद के व्यवहार में जब तक मौलिक बदलाव नहीं आता, तब तक भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता या सार्थक बातचीत का कोई खास अर्थ नहीं है। सूद ने यह बातें मंगलुरु लिटरेचर फेस्टिवल में “ग्लोबल पावर डायनेमिक्स” विषय पर आयोजित एक सत्र के दौरान कहीं।

विक्रम सूद ने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेता खुले मंचों से यह कहते रहे हैं कि उनका देश एक इस्लामिक राज्य है और गैर-मुसलमानों के खिलाफ जिहाद जारी रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को भी जिहाद के नजरिए से देखता है और सिर्फ सही मौके का इंतजार कर रहा है। ऐसे हालात में भारत को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि बातचीत से स्थायी समाधान निकल सकता है।

पूर्व रॉ चीफ ने भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत के पास इस समय एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि डेमोग्राफी, मजबूत लोकतंत्र और नीतिगत स्पष्टता देश के पक्ष में हैं। अगर अभी निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। सूद ने यह भी कहा कि भारत को बाहरी समर्थन पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के साथ व्यावहारिक और संतुलित रिश्ते बनाने चाहिए।

सूद के अनुसार, प्रभावी शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमता और शक्ति जरूरी है। उन्होंने उरी और बालाकोट स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि ये अभियान भारत की बढ़ती रणनीतिक मुखरता को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अपार सैन्य शक्ति के बावजूद अमेरिका ने 1940 के दशक के बाद कोई पारंपरिक युद्ध सीधे तौर पर नहीं जीता है।

विक्रम सूद ने 2000 से 2003 तक रॉ प्रमुख के रूप में काम किया। रिटायरमेंट के बाद वे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन जैसे थिंक टैंक्स से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं।

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