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फीस फ्री, लेकिन खर्च और माहौल बना बोझ, रायपुर में 5 साल में 9 हजार बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई

रायपुर। राजधानी रायपुर में आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा पाने वाले बच्चों की स्थिति चिंताजनक है।

फीस माफ होने के बावजूद प्राइवेट स्कूलों में कॉपी, किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और टाई-बेल्ट के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। सरकार सिर्फ ट्यूशन फीस देती है, लेकिन बाकी खर्च माता-पिता को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि पिछले 5 वर्षों में 9 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं।

हर साल 4,500 से 5,000 बच्चे आरटीई में एडमिशन लेते हैं, लेकिन आधे से ज्यादा बच्चे सालभर में ही स्कूल छोड़ देते हैं। विभाग के पास यह जानकारी तक नहीं कि बच्चों ने पढ़ाई क्यों छोड़ी। इसलिए इस बार शाला त्यागी बच्चों के लिए मेंटर नियुक्त किए जा रहे हैं, जो माता-पिता से कारण पता करेंगे।

पड़ताल में सामने आया कि यूनिफॉर्म व कॉपी-किताब का खर्च गरीब परिवारों पर भारी पड़ता है। साथ ही सामाजिक माहौल भी एक बड़ी वजह है। इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाले अन्य बच्चों और आरटीई से आए बच्चों के बीच आर्थिक व सामाजिक अंतर होता है, जिसके कारण कई बच्चे खुद को असहज महसूस करते हैं और स्कूल छोड़ देते हैं।

आरटीई के तहत सरकार प्राइमरी विद्यार्थियों के लिए 7,000 रुपए, मिडिल के लिए 11,400 रुपए और यूनिफॉर्म व सामग्री के लिए 540 से 450 रुपए देती है। पर निजी स्कूल अपनी महंगी एक्टिविटीज और बाहरी किताबों पर जोर देते हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि कमीशन के खेल के कारण स्कूल महंगी किताबें खरीदवाते हैं और सरकार चाहे तो इन अतिरिक्त फीसों को पूरी तरह माफ कर सकती है।

कई केसों में यूनिफॉर्म का पैसा भी बच्चों को वापस नहीं मिलता। वहीं, ट्रांसफर, अन्य स्कूलों में एडमिशन, 10वीं में फेल होना और आत्मानंद स्कूलों में ज्यादा प्रवेश मिलने से भी आरटीई बच्चों के ड्रॉपआउट बढ़े हैं।

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