कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में पदस्थ आबकारी अधिकारी अभिनव रायजादा के खिलाफ बैगा आदिवासी समाज ने गंभीर आरोप लगाए हैं। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा समुदाय के गरीब ग्रामीणों को कथित रूप से झूठे आबकारी मामलों में फंसाया जा रहा है। आरोप है कि महुआ शराब से जुड़े प्रकरणों में वास्तविक मात्रा से अधिक शराब दर्शाकर केस बनाए जा रहे हैं और कार्रवाई के नाम पर ग्रामीणों से पैसे की मांग की जा रही है।
समाज द्वारा शिकायत किए जाने के बाद भी आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अब तक कोई औपचारिक जांच शुरू नहीं की गई है, जिससे पीड़ित परिवारों और समाज के लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
पीड़ित महिला सगनी बैगा ने आरोप लगाया कि उनके घर में तीन-चार बोतल महुआ शराब रखी हुई थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान इसे बढ़ाकर 15 से 16 बोतल बताया गया। उन्होंने कहा, “कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद से मेरे पति गायब हैं और उनका कोई पता नहीं चल रहा है।”
इसी तरह सरोत्तीन बैगा ने आरोप लगाया कि उनके घर में रखी 10 से 12 बोतल शराब को कार्रवाई के दौरान 40 से 45 बोतल दर्शाया गया। उन्होंने दावा किया कि मामले से बचाने के नाम पर उनसे 25 हजार रुपये लिए गए, लेकिन इसके बाद भी उनके पति को नहीं छोड़ा गया।
बैगा समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि महुआ शराब से जुड़े मामलों में कई ग्रामीणों के खिलाफ मनमाने तरीके से प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में पहले ग्रामीणों से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर गंभीर मामले तैयार कर दिए गए।
आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष कामू बैगा ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी लगातार बैगा समाज के लोगों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से बचाने या चालान कम करने के नाम पर ग्रामीणों से 10 से 20 हजार रुपये तक की राशि मांगी जा रही है।
समाज ने ज्ञापन सौंपकर संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने, पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है। बैगा समाज का कहना है कि कथित कार्रवाई से कई गरीब परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द न्याय दिलाने की अपील की है।
