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नक्सलवाद के साये से निकलकर खेलों की नई पहचान गढ़ता छत्तीसगढ़: रक्षा खडसे

रायपुर। छत्तीसगढ़, जिसकी पहचान कभी संघर्ष और नक्सलवाद से होती थी, आज वह खेलों के माध्यम से एक नई उम्मीद और बदलाव की इबारत लिख रहा है। राजधानी रायपुर और जगदलपुर में आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ के दौरान केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए इस परिवर्तन को ऐतिहासिक बताया।

भविष्य के ओलंपियन हैं आदिवासी एथलीट
खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने जगदलपुर और रायपुर के दौरों के दौरान देश भर से आए 2,500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को ‘भविष्य का ओलंपियन’ करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि आज आदिवासी युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए इतना बड़ा मंच मिला है। उनके अनुसार, यह आयोजन इस बात का संकेत है कि इन युवाओं की काबिलियत को अब सबसे ऊंचे स्तर पर पहचाना और निखारा जा रहा है।

नक्सलवाद का अंत और खेलों का उदय
अपने संबोधन में खेल राज्य मंत्री ने कहा, “एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विजन से नक्सलवाद का खात्मा हुआ है और अब यहाँ के युवा अपनी ऊर्जा को खेलों के माध्यम से देश के लिए पदक जीतने में लगा रहे हैं।” उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ से निकले खिलाड़ी भविष्य में ओलंपिक और एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

अस्मिता लीग का दिख रहा है असर
खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने ‘अस्मिता लीग’ के सकारात्मक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां अस्मिता लीग का हिस्सा रही हैं। विशेष रूप से तैराकी में जीते गए सभी 5 स्वर्ण पदक इसी लीग की खिलाड़ियों ने हासिल किए हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में भी इन खिलाड़ियों का दबदबा बरकरार है। शासन का लक्ष्य है कि इस लीग को ग्रामीण स्तर तक ले जाया जाए ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सके।

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