दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की आहट के बीच निर्वाचन आयोग (EC) ने अपनी सख्ती बरकरार रखी है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने सोमवार को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 73 रिटर्निंग अफसरों (ROs) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। हटाए गए अधिकारियों में अधिकांश सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) स्तर के हैं।
प्रशासनिक फेरबदल का व्यापक स्वरूप
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर आमतौर पर प्रत्येक सीट के लिए एक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त होता है। इस लिहाज से आयोग ने एक चौथाई से भी अधिक ROs को बदल दिया है।
यह कार्रवाई केवल यहीं तक सीमित नहीं रही है। पिछले बुधवार को ही आयोग ने कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा और दार्जिलिंग सहित 11 जिलों में नए जिला मजिस्ट्रेट तैनात किए थे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद से मुख्य सचिव, गृह सचिव, राज्य पुलिस महानिदेशक (DG) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों पर भी बदलाव किए जा चुके हैं।
कानूनी और राजनीतिक घमासान
आयोग के इस कदम ने राज्य में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज कर दी है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए कड़ी निंदा की है। वहीं, यह मामला अब कलकत्ता हाई कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की पीठ के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील कल्याण बनर्जी ने आयोग की मंशा पर सवाल उठाए। इसके जवाब में आयोग के वकील ने स्पष्ट किया कि “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह कदम अनिवार्य हैं। पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और प्रत्येक राज्य की परिस्थितियों के अनुसार प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं।”
