मृतक के पोते ने जमानत रद्द करने की मांग की, मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से मिली थी राहत; हत्या की पहली बरसी पर होगी अहम सुनवाई
पटना। बिहार के मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनंत सिंह की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की है। खास बात यह है कि इसी दिन दुलारचंद यादव की हत्या की पहली बरसी भी है।
मृतक के पोते ने दी जमानत को चुनौती
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट के मार्च 2026 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अनंत सिंह को जमानत दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
राज्य सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों का हवाला दिया है। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी हिंसा
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा में अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान हुई हिंसा में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा सीट से चुनाव जीत लिया था।
जदयू से निष्कासन के बाद बढ़ी मुश्किलें
अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जदयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की गई है। नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से तय होगा कि अनंत सिंह को मिली जमानत बरकरार रहती है या उन्हें फिर जेल जाना पड़ सकता है।
