सपनों को मिले पहिए: बैसाखी से आत्मनिर्भरता तक भीमा की प्रेरक कहानी

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम हरदी के रहने वाले भीमा मारकंडे ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।

कभी मजदूरी करने हैदराबाद गए भीमा की जिंदगी एक हादसे ने बदल दी, जब वे निर्माण कार्य के दौरान ऊंचाई से गिर गए। इस दुर्घटना में उनकी कमर में गंभीर चोट आई और वे 80 प्रतिशत दिव्यांग हो गए। परिवार में दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी और चलने-फिरने में असमर्थता ने उनकी जिंदगी को चुनौतीपूर्ण बना दिया।

हालांकि, भीमा ने हार नहीं मानी। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के जरिए बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन किया। 4 मई 2026 को आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के दौरान उन्हें यह सुविधा मिली, जिसने उनकी जिंदगी में नया मोड़ ला दिया। यह ट्राइसाइकिल उनके लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का साधन बन गई।

अब भीमा बिना किसी सहारे के रोजगार की तलाश में दूर-दराज तक जा सकते हैं। दूसरों पर निर्भरता कम होने से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। वे कहते हैं कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल ने उन्हें नई जिंदगी दी है।

समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक के अनुसार, जिले में 40 से 79 प्रतिशत दिव्यांगता वाले 100 से अधिक लोगों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

भीमा की कहानी यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकते हैं। अब भीमा रुकने वाले नहीं, बल्कि अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए तैयार हैं।

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