बस्तर में लोकतंत्र की वापसी का उत्सव, 47 गांवों में पहली बार मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक चले नक्सल हिंसा के दौर के बाद अब शांति, भरोसे और लोकतंत्र की नई सुबह दिखाई देने लगी है।
बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था, वहां इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन होगा। यह बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का प्रतीक माना जा रहा है।
पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति, सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और ग्रामीणों के सहयोग से नक्सल प्रभावित इलाकों में हालात तेजी से सुधरे हैं।
इन क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित होने से न सिर्फ सुरक्षा मजबूत हुई है, बल्कि प्रशासन की प्रभावी मौजूदगी भी बनी है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि पहले जहां तिरंगा फहराना भी जोखिम भरा था, वहीं अब ग्रामीण खुद उत्साह के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
बीजापुर जिले के 16 गांव, नारायणपुर जिले के 21 गांव और सुकमा जिले के 10 गांवों में इस बार पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह होगा। इन गांवों में तिरंगा फहराने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत और सामूहिक आयोजन किए जाएंगे। सुरक्षा बलों और प्रशासन की मौजूदगी से ग्रामीणों में विश्वास का माहौल बना है।
बस्तर क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा कैंपों ने विकास के रास्ते भी खोले हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं अब धीरे-धीरे इन दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं। जगरगुंडा जैसे इलाकों में दोबारा बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत होना इसी बदलाव का संकेत है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि सुशासन की सरकार बस्तर को माओवाद के भय से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर अब शांति और लोकतंत्र के नए युग में प्रवेश कर रहा है। गणतंत्र दिवस 2026 पर इन 47 गांवों में पहली बार लहराता तिरंगा, शांति और लोकतंत्र की जीत का सशक्त संदेश देगा।





