दिल्ली ब्लास्ट: खाड़ी देश भागने वाली थी डॉ. शाहीन, पाकिस्तानी हैंडलर से होना था संपर्क

दिल्ली। दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल की मास्टरमाइंड मानी जा रही डॉ. शाहीन सईद ब्लास्ट के तुरंत बाद देश छोड़कर खाड़ी देश भागने वाली थी।

जांच में पता चला है कि वह अपने पाकिस्तानी हैंडलर से मिलने की तैयारी कर चुकी थी। इसके लिए वह नया पासपोर्ट बनवा रही थी, लेकिन ब्लास्ट से सात दिन पहले हुए वेरिफिकेशन के बाद पुलिस पासपोर्ट रिपोर्ट जमा नहीं करा पाई। इसी वजह से वह देश से निकल नहीं सकी और एजेंसियों के हाथ लग गई।

सूत्रों के मुताबिक, शाहीन के लॉकर से खाड़ी देशों की करेंसी मिलने के बाद NIA अब उसकी पुरानी विदेश यात्राओं की पूरी जानकारी खंगाल रही है। वह वर्षों से बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और दुबई जैसे देशों की यात्रा कर रही थी। वहीं, एनजीओ के जरिए आतंकी नेटवर्क के लिए फंड जुटाने का भी खुलासा हुआ है। एजेंसी ने उससे जुड़े तीन एनजीओ के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन पकड़े हैं।

गुरुवार रात अल फलाह यूनिवर्सिटी के उसके लॉकर से 18.50 लाख रुपए कैश, सोने के बिस्किट और अन्य गहने मिले हैं। माना जा रहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल स्थानीय सपोर्ट तैयार करने और गरीब मरीजों को आर्थिक मदद के नाम पर नेटवर्क में जोड़ने के लिए किया जा रहा था। अब एजेंसी सोने-चांदी और कैश के सोर्स की जांच में जुटी है।

NIA शाहीन को जल्द लखनऊ और कानपुर लेकर जाएगी। वह कानपुर में 2006 से 2013 तक मेडिकल कॉलेज में प्रवक्ता और विभागाध्यक्ष रही। इसी दौरान वह एनजीओ के संपर्क में आई और खाड़ी देशों से फंड जुटाने लगी। लखनऊ में उसके परिवार के घरों की तलाशी और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा चुकी है। उसका भाई परवेज पहले ही गिरफ्तार है।

जांच में यह भी सामने आया है कि जैश-ए-मोहम्मद ने उसे “मैडम सर्जन” कोड नेम दिया था और महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का इंचार्ज बनाया था। शनिवार को कोर्ट ने शाहीन सहित चारों आरोपियों की रिमांड 10 दिन और बढ़ा दी है। एजेंसियां अब इस मॉड्यूल की फंडिंग और विदेशी लिंक की गहराई से जांच कर रही हैं।

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