छत्तीसगढ़

मौत का अस्पताल! आखिर कब लेंगे ऐसी घटनाओं से हम सीख

रायपुर। राजधानी रायपुर के पचपेड़ा नाका स्थित एक निजी अस्पताल में आज लगी आग से 4 लोगों की मृत होने की सूचना मिली है, जो प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि की घोषणा की है।

रायपुर के राजधानी अस्पताल के आईसीयू में कोरोना मरीज भी भर्ती थे। एक मरीज की जलकर जबकि 3 मरीजों की दम घुटने से मौत हुई। आग लगने के पीछे का कारण शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है। मगर इसमें सोचने वाली बात है कि क्या इतने बड़े अस्पताल में आग बुझाने की किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं थी? प्रशासन ऐसे अस्पतालों को शुरू करने का अनुमति कैसे दे देती है? 3 से 4 हजार स्क्वायर फीट में अस्पतालों को बनाया जा रहा है, क्या अस्पताल शुरू होने से पहले प्रशासन के अधिकारी क्या दौरा नहीं करते हैं? ऐसे कई सवाल है, जो प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की कलई को खोलते हैं। ये राजधानी रायपुर की ही बात नहीं है। राज्य के 28 जिलों में छोटे-छोटे अस्पतालों का संचालन हो रहा है। छोटे-छोटे घरों को किराए में लेकर अस्पताल संचालित किया जा रहा है।

अगर हम देश की बात करें तो मुंबई के कोविड और गुजरात के कुछ अस्पतालों में आगजनी के बाद प्रशासन की पोल खोलकर रख दी। इस हादसे में कई मरीजों की मौत हुई थी, लेकिन हम दूसरे राज्यों में हुई घटनाओं से सीख लेने के बजाय अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जो चाहे जैसे चाहे हॉस्पिटल खोलकर अपने यहां मरीजों को भर्ती कर रहा है। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन मोटी रकम परिजनों से वसूलता है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में अब प्रशासन को ऐसे छोटे अस्पतालों को चिन्हित कर आगे की कार्रवाई करनी है। साथ ही अस्पतालों में आग लगने के बाद उसे बुझाने की सुविधा के साथ अस्पताल कितनी बड़ी जगह में खुल रहा है, इसे लेकर अब प्रशासन को सजग होना पड़ेगा। अभी तो हम सिर्फ 4 मरीजों को खोये है। इससे सबब लेकर प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को हॉस्पिटल में कई प्रकार की व्यव्स्था

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