रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में बदले मौसम के मिजाज ने जनजीवन को प्रभावित किया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में तेज अंधड़, बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई, जिससे दिन के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है।
ओलावृष्टि और बारिश की मार
प्रदेश के उत्तरी हिस्से, विशेषकर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भारी बारिश के साथ बड़े आकार के ओले गिरे। वहीं, रायगढ़ में देर रात गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ीं।
गरियाबंद और धमतरी के नगरी व कुरुद क्षेत्रों में भी ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के कई स्थानों पर 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
क्यों बदला मौसम? (तीन सक्रिय सिस्टम)
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में तीन मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं:
- चक्रवाती घेरा: उत्तरी मध्य प्रदेश के ऊपर 0.9 किमी की ऊंचाई पर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है।
- द्रोणिका रेखा (Trough Line): यह रेखा मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र के विदर्भ तक फैली है, जो छत्तीसगढ़ की सीमा के बेहद करीब है।
- नमी का प्रवाह: आंध्र प्रदेश के ऊपर बने सिस्टम के कारण बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी छत्तीसगढ़ की ओर आ रही है।
खेती और स्वास्थ्य पर असर
बेमौसम बारिश और ओलों ने रबी की फसलों (गेहूं, चना) और उद्यानिकी फसलों, जैसे आम के बौर, को भारी नुकसान पहुंचाया है। ओले गिरने से फूल झड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। साथ ही, नमी बढ़ने से उमस वाली गर्मी और अचानक तापमान गिरने से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
