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PM के संबोधन पर विवाद: 700 बुद्धिजीवियों ने चुनाव आयोग से की शिकायत

दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर विवाद गहरा गया है। 700 से अधिक बुद्धिजीवियों ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। यह पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजा गया है।

शिकायतकर्ताओं में पूर्व नौकरशाह, राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर 33% महिला आरक्षण को लेकर टिप्पणी की, जो चुनावी माहौल में पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी में आता है।

बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया, जो सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं। ऐसे में इसे सत्ता पक्ष को अनुचित लाभ देने वाला कदम माना जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि इस प्रसारण को अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी समान समय और अवसर दिया जाना चाहिए था।

पत्र में कहा गया है कि यदि यह संबोधन चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना प्रसारित हुआ है, तो यह आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे में आयोग को इस भाषण को सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, सरकारी वेबसाइट और मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश देने चाहिए, साथ ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

इस शिकायत पर हस्ताक्षर करने वालों में दिग्विजय सिंह, नजीब जंग, एम. जी. देवसहायम, जोया हसन, टी. एम. कृष्णा और योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है।

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