रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कृषि, पशुपालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव मिलने से महिलाओं की आय और आत्मविश्वास दोनों बढ़ रहे हैं।
सरगुजा जिले के झूमरपारा की शकुंतला राजवाड़े इसकी प्रेरक मिसाल हैं। गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने खेती में नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन को अपनाया है।
उत्पादक समूह के माध्यम से उन्हें बाजार की तुलना में कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण धान बीज मिला, जिसका उपयोग उन्होंने एक एकड़ खेत में किया।
शकुंतला बताती हैं कि उन्हें 20 रुपये से कम की दर पर धान बीज उपलब्ध हुआ। इससे खेती की शुरुआती लागत कम हुई। कृषि सखी और पशु सखी के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने धान की खेती में लाइन विधि अपनाई।
इस पद्धति से पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने, फसल प्रबंधन और कृषि कार्यों को व्यवस्थित करने में सुविधा मिल रही है।
अंबिकापुर विकासखंड में बिहान के तहत 25 गांवों की 19 ग्राम पंचायतों के 505 स्व-सहायता समूहों से 5,540 परिवार जुड़े हैं। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 16 उत्पादक समूह गठित किए गए हैं।
वहीं 22 उत्पादक समूहों ने एफपीसी के माध्यम से धान बीज का व्यवसाय किया है। इससे किसानों को उचित दर पर बीज मिला और महिला समूहों को बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।
बिहान से जुड़कर शकुंतला अब ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उनमें निर्णय लेने और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का आत्मविश्वास बढ़ा है।
वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
