Chhattisgarh: 27 सितंबर भारत बंद, समर्थन में निकली मशाल रैली

रायपुर। (Chhattisgarh) देश के किसान संगठनों के 27 सितंबर के भारत बंद के आव्हान का पूर्ण समर्थन करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच व अन्य जनसंगठनों ने रायपुर में आज मशाल रैली आयोजित की । यह रैली कर्मचारी।भवन से निकलकर कालीबाड़ी, महिला थाना, मोतीबाग, छोटापारा,।कोतवाली होते हुए सप्रे स्कूल में समाप्त हुई ।
(Chhattisgarh) ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उल्लेखनीय है कि संसद का दुरुपयोग कर पारित 3 किसान विरोधी, कॉर्पाेरेट पक्षधर कृषि कानूनों को निरस्त करने, बिजली विधेयक 2021 को वापस लेने और सभी फसलों की सी-2+ 50 फीसदी पर समर्थन मूल्य की गारंटी देने, मजदूर विरोधी श्रम संहिता वापस लेने , सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण वापस लेने, युवाओ को रोजगार का अधिकार देने, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर रोक और मंहगाई पर नियंत्रण , फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर देश के सभी किसान व बी एम एस को अन्य सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 27 सितंबर को भारत बंद का आव्हान किया है जिसका सभी विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया है ।
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(Chhattisgarh) रैली में शामिल एम के नंदी, धर्मराज पेट्रोल, एस सी भट्टाचार्य, प्रदीप गभने, नवीन गुप्ता, राजेश अवस्थी, सुरेंद्र शर्मा, अलेकजेंडर तिर्की, प्रदीप मिश्रा, निसार अली, आलोक वर्मा, मारुति डोंगरे, मनोज देवांगन, चंद्रशेखर तिवारी, अतुल देशमुख, बी के ठाकुर, के के साहू, टी के मिश्रा, ऋषि मिश्रा, वासुदेव शुक्ला, साजिद राजा, अलीम खान, मोइज कपासी ने प्रमुख रूप से अपने संबोधन में डीजल, रसोई गैस, उर्वरक की कीमतों को आधा करने की मांग की । वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की नीलामी का विरोध करते हुए सरकार पर कॉरपोरेट की सेवा में मदद करने के लिए, लोगों की आय से अपनी वसूली को बढ़ाने का आरोप लगाया । पिछले सप्ताह सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र से बकाया की वसूली स्थगित कर दी है और बैंक खातों से 2 लाख करोड़ रुपये तक के कॉर्पोरेट बकाया को भी हटा दिया है।
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विभिन्न किसान यूनियनों के नेता, रेत खदान श्रमिक नेता, ट्रेड यूनियन और अन्य संगठन सभा को संबोधित करेंगे।
अनुबंध खेती अधिनियम को लागू करके, सरकार और उसकी प्रशासनिक – पुलिस मशीनरी, निर्दिष्ट क्षेत्रों के किसानों को केवल उन्हीं फसलों को बोने के लिए मजबूर करेंगी जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों सहित बड़ी कंपनियों के लिए व्यावसायिक मूल्य की हैं। इस इलाके के किसान जीवित रहने के लिए अनाज पैदा करते हैं। वे अनाज नहीं उगा पाएंगे। उन्हें कंपनी से उच्च लागत पर इनपुट और मशीनीकृत सेवाएं खरीदनी होंगी जिससे इनपुट लागत बढ़ेगी और कृषि अलाभकारी हो जाएगी। ठेके में शामिल खेत बटाईदारी के लिए उपलब्ध नहीं बचेंगे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 से 30% खेती बटाईदारी से होती है। मशीनीकृत सेवाओं से खेती मे श्रम कार्य घट जाएगा और पशुपालन के काम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस इलाके के आधे ग्रामीण खेत मजदूरी व पशुपालन पर निर्भर है।
नया मंडी अधिनियम लागू करके, सरकार एमएसपी पर फसल खरीद बंद कर देगी और ये कंपनियां केवल सबसे कम उपलब्ध ऑनलाइन कीमतों की पेशकश करेंगी जिससे सबसे ज्यादा असर सब्जी उगाने वाले छोटे किसानों पर पड़ेगा। सरकारी खरीद समाप्त होने से राशन में अनाज मिलना भी बंद हो जाएगा।
आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम भोजन को जीवन के लिए आवश्यक होने की सूचीे से हटा देता है, उनकी कीमतों को हर साल 1.5 गुना बढ़ाने की अनुमति देता है और कॉरपोरेट्स को खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी करने की अनुमति देता है।
वक्ताओं ने सभी नागरिकों से देश बचाने कीनिया लड़ाई में किसानों का समर्थन करते हुए 27 सितंबर के भारत बंद को सफल बनाने का आव्हान किया ।