रायपुर। छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज और स्टील का केंद्र ही नहीं, बल्कि ग्रीन इकोनॉमी (Green Economy) के क्षेत्र में भी देश का नेतृत्व करने को तैयार है।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित ‘दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में धरती को माँ का दर्जा प्राप्त है और प्रकृति का संरक्षण हमारी रग-रग में बसा है।
विरासत के साथ विकास: ग्रीन स्टील और सोलर विजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘डबल इंजन’ सरकार विकास और विरासत को साथ लेकर चल रही है। ग्रीन स्टील: स्टील उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में छत्तीसगढ़ अब ‘कार्बन फुटप्रिंट’ कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपना रहा है।
वन आवरण में अव्वल: भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार, संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
जनजातीय संस्कृति: संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण
मुख्यमंत्री ने बस्तर और सरगुजा की जनजातीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से ढका है।
सरना (देवस्थल): जनजातीय समाज वृक्षों को देवता के रूप में पूजता है। राज्य सरकार ने ‘सरना’ को राजस्व रिकॉर्ड में देवस्थल के रूप में दर्ज कर इस परंपरा को आधिकारिक सम्मान दिया है।
ई-ऑफिस: कागज के उपयोग को कम करने के लिए सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की गई है, जिससे हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा रहा है।
नई औद्योगिक नीति और प्रोत्साहन
सीएम साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल (Green Initiatives) करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें दी जा रही हैं।
सोलर रूफटॉप योजना और बायो-एथेनॉल उत्पादन के जरिए राज्य ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने जनजातीय कहानियों पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” और शोध संकलन “एब्स्ट्रेक्ट” का विमोचन किया। उन्होंने आह्वान किया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत हर नागरिक को स्वयं से करनी चाहिए।
