8वें वेतन आयोग की कार्यप्रणाली में बदलाव: राज्यों का दौरा नहीं करेगा आयोग, 30 अप्रैल तक ऑनलाइन मांगे सुझाव

रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा गठित आठवां वेतन आयोग की कार्यप्रणाली में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। पिछले वेतन आयोगों की तरह इस बार आयोग राज्यों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों से सीधे मुलाकात नहीं करेगा। आयोग ने समय की कमी को देखते हुए सुझाव और ज्ञापन केवल डिजिटल माध्यम से लेने का निर्णय लिया है।
आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई कर रही हैं। आयोग ने सेवारत कर्मचारियों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य हितधारकों से 30 अप्रैल 2026 तक अपने सुझाव ऑनलाइन भेजने को कहा है। इसके लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और ‘माय गव’ पोर्टल पर विशेष ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध कराया गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल के माध्यम से जमा किए गए सुझाव ही मान्य होंगे। किसी भी प्रकार की हार्ड कॉपी, ईमेल या पीडीएफ के रूप में भेजे गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसलिए सभी संबंधित संगठनों और व्यक्तियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन ही अपने प्रस्ताव और मांगें दर्ज करने का आग्रह किया गया है।
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आठवें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है। यदि किसी मुद्दे पर जल्द निर्णय की जरूरत पड़ी तो आयोग अंतिम रिपोर्ट से पहले अंतरिम रिपोर्ट भी पेश कर सकता है।
इस वेतन आयोग का असर देश के बड़े वर्ग पर पड़ेगा। अनुमान है कि इससे करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में बदलाव हो सकता है। हालांकि निजी क्षेत्र के कर्मचारी, संविदा कर्मी और सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रम सीधे तौर पर इसके दायरे में नहीं आते। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की मांग प्रमुख मुद्दा हो सकती है, जिससे कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव संभव है।



