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संसद के दोनों सदनों में ‘CAPF बिल 2026’ पारित: गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष के भ्रम को किया खारिज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

राज्यसभा से बुधवार को पारित होने के बाद, ‘द सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल, 2026’ गुरुवार को लोकसभा से भी ध्वनि मत से पास हो गया। इस विधेयक के माध्यम से सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों के नियमों में एकरूपता लाने का प्रावधान है।

विपक्ष पर तीखा प्रहार
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर इस बिल को लेकर भ्रम फैला रहा है और अपनी “राजनीतिक रोटी” सेंकने का प्रयास कर रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून पूरी तरह से बलों के हित में है और इससे प्रमोशन, वरिष्ठता या अन्य सेवाओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नए कानून के मुख्य लाभ
मंत्री ने सदन में बिल के फायदों को गिनाते हुए कहा:

प्रशासनिक स्पष्टता: अलग-अलग नियमों के कारण ऑपरेशंस में आने वाली बाधाएं खत्म होंगी और राज्य पुलिस के साथ बेहतर समन्वय (Coordination) स्थापित होगा।

भर्तियां और महिला सशक्तिकरण: 2022 से अब तक 2.10 लाख भर्तियां हुई हैं। अब परीक्षाएं 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं। सीआरपीएफ में 6 और सीआईएसएफ में 1 समर्पित महिला बटालियन का गठन किया गया है।

कल्याणकारी योजनाएं: वीरगति प्राप्त जवानों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये की सहायता और आयुष्मान कार्ड के तहत 2,518 करोड़ रुपये का मेडिकल भुगतान किया गया है। वर्तमान में आवास संतुष्टि दर 50% से अधिक है।

पुलवामा पर जवाब और विरोध
पुलवामा हमले पर विपक्ष के सवालों का कड़ा जवाब देते हुए नित्यानंद राय ने कहा, “पुलवामा के गुनहगार या तो जेल में मिलेंगे या जहन्नुम में।” दूसरी ओर, पूर्व अर्धसैनिक बलों के संगठनों (AAPWA) ने इसे “काला दिन” बताते हुए कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। सरकार का दावा है कि यह बिल भविष्य की चुनौतियों के लिए सुरक्षा बलों को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाएगा।

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