पश्चिम बंगाल में CAA के लिए दो और समितियों का गठन, केंद्र सरकार का फैसला

दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत नागरिकता आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल में दो नई सशक्त समितियों का गठन किया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, अब राज्य में कुल चार सशक्त समितियां काम करेंगी, जो पात्र आवेदकों के मामलों पर अंतिम फैसला लेंगी।
CAA के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों। केंद्र का मानना है कि नई समितियों से लंबित आवेदनों के निपटारे में तेजी आएगी और हजारों प्रवासियों को राहत मिलेगी।
गृह मंत्रालय ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर बताया कि नई समितियों की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल में जनगणना संचालन निदेशालय के उप रजिस्ट्रार जनरल करेंगे। मार्च 2024 में गठित मूल सशक्त समिति भी बरकरार रहेगी, जिसकी अध्यक्षता जनगणना संचालन निदेशक करते हैं। नई समितियां मूल समिति के कार्यभार को कम करते हुए प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएंगी।
समितियों की संरचना में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) और राज्य सूचना अधिकारी अब अपने स्थान पर अंडर सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी को नामित कर सकते हैं। वहीं सहायक खुफिया ब्यूरो अधिकारी और पोस्टमास्टर जनरल या उनके प्रतिनिधि पहले की तरह सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राज्य के गृह विभाग और रेलवे के प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।





