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पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों-SIR पर टिप्पणी कर फंसी BJP, मतुआ समुदाय में नाराजगी

दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिए गए एक बयान के बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई है। पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य की टिप्पणी और ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के गोसांई से कथित मारपीट की घटना ने विवाद को और गहरा दिया है।

4 जनवरी को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लाल सिंह आर्य ने कहा था कि जो लोग बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आए हैं, उनके नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए। इस बयान के बाद मतुआ समुदाय में तीखी नाराजगी फैल गई। समुदाय के लोग इसे शरणार्थी मतुआ परिवारों के खिलाफ समझ रहे हैं। हालात बिगड़ते देख भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि यह आर्य का निजी विचार है, पार्टी की आधिकारिक राय नहीं। इसके बाद पार्टी ने उनका वीडियो सोशल मीडिया से भी हटा दिया।

इसी बीच उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के एक गोसांई से मारपीट का मामला सामने आया। आरोप है कि यह हमला केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने इसलिए किया, क्योंकि गोसांई ने SIR के तहत नाम हटाए जाने पर सवाल उठाया था। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन घटना के विरोध में टीएमसी समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने राज्यभर में सड़क जाम का ऐलान कर दिया है।

मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थियों का बड़ा समूह है, जिसकी उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में चुनावी तौर पर निर्णायक भूमिका मानी जाती है। समुदाय ने ठाकुरनगर घटना की निष्पक्ष जांच और SIR में हटाए गए नामों को फिर से जोड़ने की मांग की है।

उधर, टीएमसी नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि SIR का सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ समुदाय को होगा। हालांकि भाजपा नेताओं का तर्क है कि शरणार्थियों को डरने की जरूरत नहीं है। 30 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि SIR और CAA के तहत योग्य मतुआ और नामशूद्र समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।

गौरतलब है कि 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 58.20 लाख नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं। SIR का दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी होगी।

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