
रवि तिवारी@देवभोग. 20 साल पहले इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल गया नागलदेही का युवक अब तक घर नहीं लौटा.. इतना ही नहीं युवक का अब तक कोई पता भी नहीं चल सका.. पत्नी और परिवार के लोग आज भी इसी उम्मीद में जी रहे है कि कही उनके घर का मुखिया लौट आये..
मिली जानकारी के अनुसार आज से 19 साल पहले नागलदेही के मुकु यादव के ऊँगली में बड़ा घाव हो गया था.. स्थानीय स्तर पर एक साल तक इलाज करवाने के बाद भी मुकु का घाव ठीक नहीं हुआ.. दिन ब दिन दर्द बढ़ता जा रहा था और घाव भी बढ़ने लगा था.. उस दौरान परिवार ने देवभोग अस्पताल में मुकु का इलाज करवाया.. इसके बाद बढ़ते घाव को देखकर उस दौरान पदस्थ देवभोग के डॉक्टर ने मुकु को इलाज के लिए रायपुर भेज दिया.. डॉक्टर के द्वारा रेफर किये जाने के बाद मुकु की पत्नी रेमती और उसकी लड़की गोपबाली मुकु को लेकर रायपुर के मेकाहारा के लिए रवाना हुए.. वहां उन्होंने मुकु को भर्ती करवाया.. इसके बाद इलाज भी शुरू हुआ.. चार दिनों तक इलाज करने के बाद वहां मौज़ूद कुछ लोगों ने पत्नी और बेटी को धमकाकर वहां से चले जाने को कहा.. धमकी से डरकर दोनों माँ और बेटी वहां से लौटकर घर वापस आ गए.. मुकु की पत्नी का कहना है कि वे 18 साल तक पति का इंतज़ार करती रही कि वे लौट आएंगे लेकिन आज तक पति नहीं लौटे और ना ही उनका कोई खबर घर तक पहुंचा.. यहां बताते चले कि मुकु का बेटा अशन यादव भी उनको खोजने राजधानी के मेकाहारा अस्पताल गया था.. लेकिन उनकी कोई खोज खबर नहीं मिली..पत्नी और परिवार को उम्मीद है कि मुकु कही से लौट आएंगे…
पता नहीं मिला तो तोड़ा चूड़ी -: रुँधे गले से मुकु की पत्नी कहती है कि ज़ब बेटा राजधानी से लौटकर आया और बताया कि पिता का पता नहीं चला तो इसके बाद रेमती ने अपने हाथों से अपना चूड़ी तोड़ा.. रेमती कहती है कि उन्होंने 18 साल तक पतिव्रता व्रत का पालन किया.. इसके बाद उन्हें उनके बेटे की शादी भी करनी थी.. समाज के बीच यह बात भी उठने लगी थी कि पति के नहीं होने से भी पतीव्रत का पालन वह क्यों कर रही है.. ऐसे में ज़ब बेटे ने आकर कह दिया कि पिता का पता नहीं चला तो इसके बाद रेमती ने खुद ही चूड़ी तोड़ने का फैसला लिया…
मजदूरी करके चार बच्चों का लिया लालन -पालन -: रेमती ने बताया कि ज़ब पति उनसे दूर हुए तो उस दौरान उनके ऊपर चार बच्चों की जिम्मेदारी थी..वहीं रेमती के परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत कमजोर था.. ऐसे स्थिति में भी रेमती ने हार नहीं माना और मजदूरी करके चार बच्चों का लालन -पालन किया.. रेमती बताती है कि उसने काफी संघर्ष कर अपने चारों बच्चों को पाला है..
स्वर्गीय समाजसेवी ने किया था बहुत ज्यादा प्रयास -: जनपद उपाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने बताया कि ज़ब मुकु का एक साल तक कोई खोज खबर नहीं मिला.. तो स्वर्गीय समाजसेवी राजेश पाण्डेय ने अपने स्तर पर पहल करना शुरू किया.. बेसरा के मुताबिक समाजसेवी ने कई जगह पत्र -व्यवहार किया.. इसके बाद उसे ढूढ़ने मेकाहारा तक भी गए लेकिन वहां भी उनका कोई खबर नहीं मिला.. जनपद उपाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने भी अपने स्तर पर कई बार मुकु को ढूढ़ने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें भी कोई क़ामयाबी नहीं मिल सका…