बायोकॉन की कमान अगली पीढ़ी को: किरण मजूमदार शॉ ने भांजी क्लेयर को चुना उत्तराधिकारी, एआई-बायोटेक पर रहेगा फोकस

मुंबई। देश की प्रमुख बायोफार्मा कंपनी बायोकॉन में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू हो गई है। कंपनी की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने अपनी भांजी क्लेयर मजूमदार को उत्तराधिकारी घोषित किया है। उन्होंने कहा कि क्लेयर कंपनी के अगले विकास चरण का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

करीब चार दशक पहले स्थापित बायोकॉन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाली किरण ने बताया कि उनकी कोई संतान नहीं है, इसलिए वे कंपनी को भरोसेमंद हाथों में सौंपना चाहती थीं। उनके अनुसार क्लेयर ने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है और जटिल बिजनेस को संभालने में सक्षम हैं।

क्लेयर मजूमदार वर्तमान में बिकारा थेरेप्यूटिक्स की फाउंडर और CEO हैं। यह कंपनी बायोकॉन द्वारा इंक्यूबेट की गई थी और 2024 में नैस्डैक पर लिस्ट हो चुकी है। कंपनी का मार्केट कैप 1.6 बिलियन डॉलर से अधिक है। क्लेयर के पास MIT और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं की डिग्री है और उन्होंने कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की है।

भविष्य की रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड बायोटेक्नोलॉजी पर विशेष जोर रहेगा। परिवार और विशेषज्ञों की मजबूत टीम भी इसमें सहयोग करेगी। उनके भाई एरिक मजूमदार एआई एक्सपर्ट हैं, जबकि उनके पति थॉमस रॉबर्ट्स ऑन्कोलॉजिस्ट हैं।

कंपनी अपने स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव कर रही है। जेनेरिक्स और बायोलॉजिक्स बिजनेस को मर्ज किया गया है और कर्ज कम करने पर फोकस है। फिलहाल कंपनी की 60% आय बायोसिमिलर्स से आती है।

किरण मजूमदार शॉ के मुताबिक, भविष्य की ग्रोथ तीन स्तंभों—डिफरेंशिएटेड बायोसिमिलर्स, ओरिजिनल बायोलॉजिक ड्रग्स और R&D में AI के उपयोग—पर आधारित होगी। इससे कंपनी को ग्लोबल बायोटेक सेक्टर में और मजबूत स्थिति मिलने की उम्मीद है।

Exit mobile version