
संदेश गुप्ता@धमतरी। जिले के आसपास के जंगलो में फिर से जुए की महफिल सजने लगी है जुए के गढ़ के नाम से विख्यात धमतरी में कई ऐसे रसुखदार लोग है… जो सिर्फ जुए के भरोसे जिंदा है खाना ,खाना भूल सकते हैं पर जुआँ खेलना नहीं और पुलिसिया कार्रवाई से तो सब वाकिफ ही है। कहाँ करना है कहां नहीं सब मालूम है इन्हें। फिलहाल कई मोहल्लो में बेधड़क जुआ खेला जा रहा है…और पुलिस कार्रवाई नही कर रही…
विदित हैं भटगांव तो जुआँ ठिया बनता जा रहा हैं…कुरूद के जंगल , नगरी के जंगल और भखारा के जंगल से अछूते नही है ,और इन्हें ये भी मालूम है पुलिस को पता भी लग गया तो छुआ ,चुआउल खेलना है और क्या….जुआँ में कोई छोटू न हो तो बात बनती भी नही है …इन छोटुआ के मार्फत पुलिसया काम भी आसानी से निपट जाता है क्योंकि छोटू को पैसे का हिसाब मालूम है….