भागवत बोले- एकता खोई तो कमजोर हुए, देश को अब पहले से ज्यादा तप करना होगा

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव पर देश की एकता, सामाजिक समरसता और विकास को लेकर विचार रखे। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में मंगलवार को शस्त्र पूजन के बाद संबोधन में उन्होंने कहा कि हम विभाजित होकर कमजोर हुए। आजादी के समय देश को स्वतंत्र कराने के लिए महापुरुषों ने जो तपस्या की थी, आज उससे भी ज्यादा तप करने की जरूरत है।

भागवत ने कहा कि सभी को विविधताओं का सम्मान करना चाहिए। समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन अपनी मूल संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारे पूर्वज एक हैं और हम सबका मूल भी एक है। इसी सांस्कृतिक विरासत ने हमें अलग-अलग परिस्थितियों में आगे बढ़ने की ताकत दी है।

विकास के साथ पर्यावरण और नैतिकता भी जरूरी

संघ प्रमुख ने विकास की अवधारणा पर कहा कि ऐसा विकास होना चाहिए, जिसमें सभी को साथ लेकर चला जाए। तकनीक और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण और नैतिकता का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं से हुई जनहानि का जिक्र करते हुए कहा कि विकास ऐसा नहीं होना चाहिए कि उसे करने वाले ही सुरक्षित न रहें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल विवेक के साथ करना होगा।

नई पीढ़ी को तैयार करने की जरूरत

भागवत ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर आने वाली है। इसके लिए युवाओं को तैयार करना होगा। तकनीक अपने आप में केवल साधन है, उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने सही और गलत में अंतर समझकर आचरण करने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में पत्रकार और संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ पहुंचे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच भी मौजूद रहे। RSS हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। वर्ष 1925 में इसी दिन संघ की स्थापना हुई थी।

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