भागवत बोले- लिव-इन रिलेशन जिम्मेदारीहीन, तीन बच्चे आदर्श

दिल्ली। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग जिम्मेदारी लेने से कतराते हैं। उन्होंने परिवार को सिर्फ शारीरिक संतुष्टि का जरिया नहीं बल्कि समाज की मूल इकाई बताया। भागवत ने कहा कि परिवार वह स्थान है जहां व्यक्ति समाज में रहना सीखता है और उसके मूल्य विकसित होते हैं।
भागवत ने बच्चों की संख्या और शादी की उम्र पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की निश्चित संख्या या शादी की उम्र तय करने का कोई फॉर्मूला नहीं है, लेकिन शोध से पता चलता है कि तीन बच्चे आदर्श माने जा सकते हैं। वहीं, शादी की उम्र 19 से 25 साल के बीच उचित मानी जा सकती है। उन्होंने बताया कि पति-पत्नी और समाज मिलकर बच्चों की संख्या तय करते हैं और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
उन्होंने भारतीय जनसंख्या प्रबंधन पर भी बात की और कहा कि आबादी को प्रभावी ढंग से मैनेज नहीं किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आबादी एक बोझ भी हो सकती है और संपत्ति भी। देश की पर्यावरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं और महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर 50 साल के अनुमान पर आधारित नीति बनानी चाहिए। डेमोग्राफर्स के अनुसार यदि जन्म दर 2.1 से कम हो जाती है तो यह खतरनाक है।
भागवत ने RSS की धारणा को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि लोग अब संगठन को हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कट्टर राष्ट्रवादी मानते हैं, लेकिन यह मुस्लिम विरोधी नहीं है। संगठन लोगों के मन में किसी भी गलत धारणा को दूर करने की कोशिश करेगा, लेकिन जो सीखना नहीं चाहता उसकी मदद नहीं की जा सकती।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अंडमान-निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर डीके जोशी भी मौजूद थे। भागवत ने परिवार को समाज की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और मूल्यों का संगम बताया, जो समाज को आकार देता है। उनका यह बयान समाज में पारिवारिक मूल्यों और जनसंख्या प्रबंधन पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
यह स्पष्ट करता है कि भागवत का दृष्टिकोण परिवार और समाज को स्थिर और जिम्मेदार बनाने पर केंद्रित है, जबकि लिव-इन रिलेशनशिप और आबादी प्रबंधन को सामाजिक चिंताओं के रूप में देखा जाता है।





