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भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर: शाह

जगदलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की संस्कृति का आभूषण है और यहां की जनजातीय परंपराएं देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करती हैं।

बस्तर पंडुम के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर की गौरवशाली संस्कृति को नए प्राण देने का कार्य किया है। गृहमंत्री शाह आज जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 के तीन दिवसीय संभाग स्तरीय आयोजन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर पंडुम 2026 के विजेताओं को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ सम्मानित किया।

केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लोक कलाकारों को राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन और सहभोज का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग के सात जिलों की 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों से 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में शानदार प्रस्तुति दी, जो बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण है।

गृहमंत्री शाह ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व में कहीं और नहीं है, जिसे यहां के लोगों ने प्रभु श्रीराम के समय से संजोकर रखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने दोहराया कि सरकार की लड़ाई किसी से नहीं, बल्कि भोली-भाली आदिवासी जनता की सुरक्षा के लिए है और 31 मार्च 2026 तक माओवाद को निर्णायक रूप से समाप्त किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान और आत्मा का उत्सव है।

उन्होंने कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुका है और आने वाले पांच वर्षों में यह विकास का नया मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले जहां बस्तर की पहचान माओवाद से जुड़ी थी, वहीं अब संस्कृति, पर्यटन और विकास की चर्चा देशभर में हो रही है।

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